वह मरी नहीं………………मार दी गयी………………….


13 दिनों तक जि+न्दगी और मौत से जूझते हुए आखिरकार वह लड़की मर गयी। ऐसा लग रहा है जैसे मौत उसकी नहीं हुयी है बल्कि हमारे भीतर का एक हिस्सा खामोश हो गया है। इतना खामोश कि हमें हमारी भावनाएं व्यक्त करने के लिए अल्फाज+ नहीं मिल रहे। उसकी मौत के खिलाफ हर तरफ आक्रोश है, हमारा दिल भी ग+म और ग+ुस्से से भरा हुआ है। वह चेहराविहीन लड़की जिसकी मौत हो गयी है वह दरअसल मरी नहीं है उसका चेहरा हम सबके चेहरे में समा गया है। देश के तमाम लोगों की तरह हम उस लड़की को सलाम करते हैं और अपना ग+म और ग+ुस्सा ज+ाहिर करते हैं!!!!
दरअसल 23 साल की वह लड़की मरी नहीं उसे मार दिया। उसे मारने के लिए चेहरा भले ही 6 लोगों का हो पर हज+ारों सालों से उसे बार बार मारा जाता रहा है। वर्चस्व की लड़ाई में वह बार-बार मारी जाती रही है। जी हां-बलात्कार औरतों पर वर्चस्व साबित करने का ही एक अस्त्र है। जिसका प्रयोग कभी राजसत्ता करती है तो कभी पुरुषसत्ता। दरअसल राजसत्ता और पितृसत्ता यानी पुरुषसत्ता एक दूसरे के पर्याय ही हैं। दोनो आपस में इस कदर जुड़े हुए हैं कि उन्हें अलग-अलग करना मुश्किल है। इसलिए बलात्कार के लिए कुछ बलात्कारियों को फांसी देने से बात नहीं बनेगी। यह राजसत्ता और पितृसत्ता मिल कर न जाने कबसे गरीब, दलित और अपने हक में आवाज+ उठाने वाली जनता और औरतों के जीने की इच्छा से बलात्कार करते रहे हैं। इस लिए इस कठिन सवाल का कोई आसान जवाब नहीं है। फिलहाल इतना ही। विस्तार से फिर कभी……………

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