Monthly Archives: September 2012

‘जय भीम कामरेड’ – एक वीडियो दस्तावेज

आनन्द पटवर्धन की अन्य फिल्मों की तरह ही, यह भी एक वीडियो दस्तावेज है। ‘जय भीम कामरेड’ में आनन्द पटवर्धन ने दलित लोकगायक विलास घोघरे के बहाने पूरे महाराष्ट्र के दलित आन्दोलन और ‘मुख्यधारा’ की राजनीति के साथ उसके अन्तरसम्बन्धों … Continue reading

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‘’द ग्रेप्स आफ राथ’: समाज को प्रतिबिम्बित करती एक अद्भुत फिल्म!

अभी-अभी एक शानदार फिल्म देख कर उठी हूं-‘द ग्रेप्स आफ राथ’। जान फोर्ड द्वारा 1940 में बनायी गयी यह फिल्म इसी नाम के जान स्टीनबेग के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित है। 1929-30 की मन्दी की पृष्ठभूमि पर बनी यह फिल्म मानव … Continue reading

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India: The corrupt crusade against corruption! – by lal khan

Societies seething with discontent and deprivation erupt in most peculiar ways. In India’s egregiously unequal society, the recent upheaval, if at all it can be called that, around the right-wing conservative social activist Anna Hazare shows the malaise that has … Continue reading

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राम चन्द्र गुहा की इतिहासदृष्टिः कुछ नोट्स

अभी-अभी रामचन्द्र गुहा की किताब ‘इन्डिया आफ्टर गांधी’ का हिन्दी अनुवाद ‘भारत गांधी के बाद, दुनिया के विशालतम लोकतन्त्र  का इतिहास’….पढ़ कर खत्म की। पूरी किताब को पढ़ते वक्त दिमाग में अनेकों सवाल उमड़ते घुमड़ते रहे। हालांकि यह भी सही … Continue reading

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पेरिस कम्यून पर एक महत्वपूर्ण फिल्म-‘ला कम्यून’

मशहूर फिल्मकार पीटर वाटकिन ने 1999 में पेरिस कम्यून पर एक फिल्म बनायी-‘ला कम्यून’। साढ़े पांच घण्टे की यह फिल्म इतिहास के किसी कालखण्ड पर बनी अब तक की सबसे विश्वसनीय फिल्मों में से एक है। पेरिस व आसपास के … Continue reading

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