Category Archives: General

‘खीम सिंह बोरा’- एक राजनीतिक बंदी

आज जब हम वरवर राव व अन्य राजनीतिक बन्दियों के लिए अपनी आवाज उठा रहे हैं तो हमें यह नही भूलना चाहिए कि देश की तमाम जेलों में हज़ारो ऐसे कैदी बंद हैं जो अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के कारण जेलो … Continue reading

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अंत की शुरुआत……….

दार्शनिक दृष्टी से देखेँ तो ‘अंत’ कुछ नही होता। हर ‘अंत’ के साथ एक अनिवार्य ‘शुरूआत’ जुड़ी होती है। इस बात का अहसास मुझे तब हुआ जब मैंने ‘अब्बू की नज़र में जेल’ का अन्तिम भाग असली ‘अब्बू’ को भेजा … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल- अंतिम भाग

एक दिन सुबह-सुबह गिनती के बाद अब्बू ने अचानक बिना किसी सन्दर्भ के मुझसे पूछा-‘मौसा, अगर तुम्हारे पास अपनी जेल होती तो क्या तुम मौसी को कभी जेल में डालते।’ मैंने बेहद आश्चर्य से उससे पूछा कि ये क्या पूछ … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल-12

यह मध्य जनवरी की ठंडी सुबह थी। सभी लोग ‘खुली गिनती’ के बाद तुरन्त अपने अपने बैरक में लौटने की जल्दी में थे। हम अहाते के बीच पहुंचे ही थे कि अब्बू ने मेरा हाथ झटकते हुए सामने की ओर … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल-11

गिरफ्तारी के तुरन्त पहले की कहानी- दिन भर की धमा-चौकड़ी के बाद अब रात में अब्बू को तेज नींद आ रही थी। लेकिन आंखो में नींद भरी होने के बावजूद वह अपना अन्तिम काम नहीं भूला-मुझसे कहानी सुनने का काम। … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल-10

लाॅकअप से वापस गाड़ी में बैठने के लिए वैसे ही लाइन में खड़े होना पड़ता है। जिन्होंने सीट खरीदी होती है, उन्हें पहले ही सीट पर बिठा दिया जाता है। उसके बाद शुरू होती है धक्का मुक्की। इस धक्का मुक्की … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल-9

कोर्ट से जब हम वापस हाक हेडक्वार्टर पहुंचे तो मैं काफी हल्का और आत्म विश्वास से भरा महसूस कर रहा था। निश्चय ही यह ‘इंकलाब जिंदाबाद’ नारे का प्रभाव था। अमिता थोड़ा पहले पहुंच चुकी थी। जब मैं और अब्बू … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल- 8

हमारे घर से हमें सीधे ‘हाक’ (एण्टी नक्सल फोर्स) हेडक्वार्टर लाया गया। काले बूट और गहरे हरे रंग की वर्दी में नौजवान लड़के अत्याधुनिक हथियारों से लैस किसी रोबोट की भांति इधर से उधर आ जा रहे थे। हमारे आने … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल- 6 और 7

अब्बू की नज़र में जेल-6 एक दिन खुली गिनती के समय अब्बू ने मुझसे अचानक पूछा- मौसा जब जेलर अन्दर आता है तो बड़ा वाला गेट (करीब 18-20 फुट ऊंचा) खुलता है, और जब हम लोग अन्दर आते हैं या … Continue reading

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अब्बू की नज़र में जेल-5

जेल में शनिवार का दिन हमारे लिए बहुत खास होता है। इस दिन अब्बू की मुलाकात अपनी मौसी से और मेरी मुलाकात अपनी पत्नी/प्रेमिका/फाइली [co-accused] अमिता से होती है। हालांकि यह मुलाकात महज आधे घण्ठे की होती है मगर फिर … Continue reading

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