Monthly Archives: December 2012

नये साल पर यह कविता पढि़ये…………..

यह कविता Egypt की पृष्ठभूमि पर लिखी गयी है। लेकिन हमारे देश में हाल के दिनों में जो घटनाक्रम रहा है, उसके मद्देनजर यह कविता हमारे लिए भी काफी प्रासंगिक हो जाती है। यह कविता Hughe ने लिखी है। Dream … Continue reading

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वह मरी नहीं………………मार दी गयी………………….

13 दिनों तक जि+न्दगी और मौत से जूझते हुए आखिरकार वह लड़की मर गयी। ऐसा लग रहा है जैसे मौत उसकी नहीं हुयी है बल्कि हमारे भीतर का एक हिस्सा खामोश हो गया है। इतना खामोश कि हमें हमारी भावनाएं … Continue reading

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‘साल्ट आफ दि अर्थ’-मजदूर आंदोलन का नारीवादी विमर्श

‘साल्ट आफ दि अर्थ’ 1953 में बनी एक बेहतरीन फिल्म है। बनने के लगभग 7-8 साल बाद तक यह थियेटर का मुंह नही देख सकी थी। अमरीकी सरकार ने इस फिल्म के डायरेक्टर समेत लगभग सभी कलाकारों को ब्लैकलिस्ट कर … Continue reading

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‘सभ्य’ समाज का निर्मम और बदसूरत चेहरा पेश करती फिल्म- ‘रोटी’

तो बात करते हैं 1942 में महबूब द्वारा निर्देशित फिल्म ‘रोटी’ की। बरसों पहले इस फिल्म को दूरदर्शन पर देखा था। यह फिल्म पूंजीवादी सभ्यता और वर्ग आधारित समाज पर आदर्शवादी नजरिये से बहुत ही तीखा कटाक्ष करती है। फिल्म … Continue reading

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खालरा साहब कौन थे?

‘इंटरनेशनल पीपुल्स ट्रीब्यूनल आन हयुमन राइट्स एण्ड जस्टिस इन इंडिया एडमिनिस्टर्ड काश्मीर‘ [IPTK], की रिपोर्ट इसी महीने प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि कश्मीर में पिछले 22 सालों में हुए मानवाधिकार उल्लंघन के लिए भारतीय … Continue reading

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