Daily Archives: 2012/10/26

नीलोफ़र

वह रोज़ मेरे ज़हन में शबनम बनके झरा करती है, चुपचाप.. स्मृतियों की हरी घास पर न जाने कब आकर चिपक जाती है लिपट जाती है मुझसे मुझे बचा लो… नहीं कर पाती मैं कुछ. क़तरा-क़तरा साफ शफ़्फ़ाक़ शबनम की … Continue reading

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