Daily Archives: 2013/07/30

‘मां’

प्रेमचंद की यह कहानी मां आज भी काफी प्रासंगिक है। इसे गोर्की की कहानी दुश्मन की मां के साथ पढ़ा जाय तो दोनो जगह के देश-काल का उसके साहित्य के साथ संबन्ध पर एक नयी दृष्टि पड़ती है। तो प्रेमचंद … Continue reading

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