‘विक्टर जारा’ : संस्कृति का महायोद्धा

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सितम्बर माह में चिली के महान गायक विक्टर जारा को याद करने के बहुत से बहाने हैं। 16 सितम्बर को उनकी शहादत के ठीक 40 साल हो जाते है। 11 सितम्बर 1973 को अमरीकी मदद से अगस्टो पीनोशेट के नेतृत्व में वहां की सेना ने कुछ ही समय पहले चुनकर आयी प्रगतिशील अलेन्दे की सरकार का तख्ता पलट दिया। इस तख्तापलट के सूत्रधार थे – तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति निक्सन और विदेश मंत्री हेनरी किसिन्जर। तख्तापलट के कुछ ही समय पहले दिये गये किसिन्जर के इस बयान पर गौर कीजिए – ‘वहां की जनता की गैरजिम्मेदारी के कारण यदि देश कम्युनिष्ट हाथों में जा रहा है तो हम इसे चुपचाप देखते नही रह सकते।’
विक्टर जारा उस वक्त वहां की कम्युतिष्ट पार्टी के महत्वपूर्ण सदस्य थे और कम्युनिष्ट पार्टी अलेन्दे सरकार का सक्रिय समर्थन कर रही थी। तख्ता पलट के बाद हुए नरसंहार में चिली का यह महत्वपूर्ण सांस्कृतिक योद्धा भी शहीद हो गया। उन्हे 12 सितम्बर को पकड़ा गया और 4 दिन यातना देने के बाद 16 सितम्बर को उनकी हत्या कर दी गयी।
इसी माह 28 सितम्बर को विक्टर जारा का जन्मदिन भी पड़ता है।
इसके अलावा इसी माह एक महत्वपूर्ण खबर यह आयी है कि विक्टर जारा की ब्रिटिश मूल की पत्नी जोन जारा ने अमरीका में विक्टर जारा के कातिलों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। ज्ञातव्य है कि बाद के दिनों में इस तानाशाह सरकार के कई सैन्य अधिकारी अमरीका में बस गये थे और वहां की नागरिकता ले ली थी। उनमें से वे अधिकारी भी शामिल थे जिन्होने विक्टर जारा की हत्या में प्रत्यक्ष भागीदारी की थी। खबर यह भी है कि मुकदमा नामजद दर्ज हुआ है।

JOAN JARA [left]

JOAN JARA [left]

विक्टर जारा पर उनकी पत्नी जोन जारा ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण किताब लिखी है-Victor – An unfinished song। दुनिया को विक्टर जारा के बारे में विस्तार से इसी किताब से पता चला। इस किताब में विक्टर जारा के पकड़े जाने और तत्पश्चात उनकी हत्या किए जाने का बहुत ही मर्मस्पर्शी चित्रण है। विक्टर जारा का सबसे पहले हाथ तोड़ा गया और उनसे कहा गया कि अब वे गिटार बजा कर दिखाये। उनकी हत्या करने के बाद उन्हे अज्ञात जगह पर दफना दिया गया। लेकिन इस काम में लगे एक मजदूर की निगाह विक्टर जारा के शरीर पर पड़ गयी। और उसने अपनी जान का जोखिम उठाते हुए इसकी इत्तला जोन जारा को दे दी। तब जाकर उन्हे जोन जारा ने सम्मानजनक तरीके से अंतिम विदाई दी।
विक्टर जारा का जन्म एक गरीब किसान परिवार में हुआ था। उनकी मां अमान्डा बहुत अच्छा गिटार बजाती थी। और लोक संगीत में वे पारंगत थी। यहीं विक्टर ने संगीत की अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पायी। और ताउम्र इस विरासत को विकसित करते रहे। शहर में आने के बाद वे मजदूर आन्दोलनों से जुड़ गये और ऐसे आन्दोलनों में सक्रिय सांस्कृतिक कर्मी की भूमिका निभाने लगे। लोक संगीत की उल्लासमयी परंपरा और मजदूर आन्दोलन की राजनीति के कारण उनके गानों में गजब की अपील होती थी। और उन्हे सुनने के लिए लाखों लोग उमड़ पड़ते थे। इसी दौरान उन्होने वहां की कम्युनिष्ट पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली और राजनीतिक अभियानों में जोर शोर के साथ उतर पड़े।
1960 का दशक दुनिया भर में उथल पुथल का दौर था। चिली भी इसका अपवाद न था। इसी दशक में चिली में बड़े पैमाने पर मजदूरों और किसानों की राजनीतिक हड़ताले हुई। संस्कृति के क्षेत्र में भी पूरे लैटिन अमरीका में न्यू सांग आन्दोलन का दौर आया। जिसने सीधे सीधे जनता का पक्ष लिया और संगीत में ‘एक्शन’ की नींव रखी। कहना ना होगा कि विक्टर जारा इस आन्दोलन की नींव में से थे। इसी समय अपनी यूरोप यात्रा के दौरान उन्होने लिखा- ”विरोध गीत’ शब्द का अब कोई औचित्य नही रह गया है। क्योकि यह बहुत ही अस्पष्ट है और इसका काफी दुरुपयोग होता है। मै इसकी जगह ‘क्रान्तिकारी गीत’ शब्द का इस्तेमाल करना पसन्द करुंगा। एक कलाकार को एक सच्चा सृजनकर्ता होना चाहिए और अपने असली अर्थ में क्रान्तिकारी होना चाहिए। एक कलाकार अपनी संप्रेषणीयता की विराट ताकत के कारण उतना ही खतरनाक होता है जितना कि एक गुरिल्ला क्रान्तिकारी।’
विक्टर जारा ने संगीत और जनता के संबधों के बारे एक महत्वपूर्ण बात लिखी है- ‘हमें यह नही सोचना चाहिए कि हम उपर से आकर नीचे जनता तक संगीत को ले जा रहे है। इसके विपरीत हमें खुद जनता तक उठना चाहिए। यह नही समझना चाहिए कि हम अपने आप को जनता तक नीचे ले जा रहे हैं। हमारा काम यह है कि हम वह चीज उन्हे वापस दे जो उनका है यानी उनकी सांस्कृतिक जड़े।’
इसी समझ के आधार पर विक्टर जारा जैसे लोगो के प्रयासों से चिली में मजदूर किसान बस्तियों में नाटक,गायन, नृत्य और कविता की छोटी छोटी मंडलिया तैयार की गयी। अलन्दे की सरकार ने जब वहां की सबसे बड़ी पब्लिशिंग हाउस का राष्ट्रीयकरण किया तो बहुत ही सस्ते दामों पर विश्व भर के क्लासिक और चिली का प्रगतिशील साहित्य जनता को सुलभ हो पाया। जोन जारा ने अपनी उसी पुस्तक में इस परिघटना पर लिखते हुए लिखा है कि यह देखना बहुत ही सुखद होता था कि बसों में सामान्य मजदूर जैक लंडन,टामस मान,गोर्की,मार्क ट्वेन और चिली के लेखकों को पढ़ रहे हैं।
चिली के शासकों ने जब विक्टर जारा की हत्या की होगी तो उनके दिमाग में यही बात रही होगी कि जनता को जगाने वाले को यदि सुला दिया जाय तो जनता भी सोई रहेगी। लेकित जैसा कि अमूमन होता है यह दांव हमेशा उल्टा पड़ता है। हमारे देश में भगत सिंह का उदाहरण है। शहीद भगत सिंह जिन्दा भगत सिंह से ज्यादा प्रभावकारी और शासकों के लिए ज्यादा खतरनाक हैं।
आज पूरे लैटिन अमेरिका में विक्टर जारा को याद किया जा रहा है और उनके गीतों पर थिरकने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आज लैटिन अमेरिका का कोई भी महत्वपूर्ण आन्दोलन ऐसा नही है जो विक्टर जारा के गीतों से न सजा हो।
विक्टर जारा ने अपनी मृत्यु से कुछ ही दिन पहले एक गीत लिखा था – मैनीफेस्टो। यह वास्तव में आज सभी संस्कृतिकर्मियों का ‘मैनीफेस्टो’ हो सकता है।
Manifesto
I don’t sing for love of singing,
or because I have a good voice.
I sing because my guitar
has both feeling and reason.
It has a heart of earth
and the wings of a dove,
it is like holy water,
blessing joy and grief.
My song has found a purpose
as Violeta would say.
Hardworking guitar,
with a smell of spring.

My guitar is not for the rich no,
nothing like that.
My song is of the ladder
we are building to reach the stars.
For a song has meaning
when it beats in the veins
of a man who will die singing,
truthfully singing his song.

My song is not for fleeting praise
nor to gain foreign fame,
it is for this narrow country
to the very depths of the earth.
There, where everything comes to rest
and where everything begins,
song which has been brave song
will be forever new.

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