The Shock Doctrine: The Rise of Disaster Capitalism

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2007 में ‘Naomi Klein‘ की बहुचर्चित और बहुपठित किताब The Shock Doctrine: The Rise of Disaster Capitalism आयी थी। 2 साल बाद 2009 में इसी किताब पर इसी नाम से एक डाक्यूमेन्ट्री भी बनी। नोमी क्लेन ने ही इसकी स्क्रिप्ट लिखी। इसे निर्देशित की “Road to Guantanamo” नामक मशहूर डाक्यूमेन्ट्री बनाने वाले Michael Winterbottom ने।
565 पेज की किताब का विकल्प तो नही है यह फिल्म लेकिन फिर भी इसने काफी प्रयास किया है कि किताब के सभी आयामों को छू लिया जाये।
60 के दशक में अमरीका में सीआईए ने एक मानसिक रोग विशेषज्ञ ‘Ewen Cameron’ के साथ मिलकर एक प्रयोग किया कि ‘शाक थेरेपी’ के माध्यम से कैसे व्यक्ति की पूरी पर्सनैलिटि को बदला जा सकता है। यानी उसके प्रतिरोध को पूरी तरह से खत्म कर देना। आगे चलकर ये प्रयोग अमरीका की ‘टार्चर इण्डस्ट्री’ में बड़े पैमाने पर प्रयोग होने लगे। ‘अबू गारिब’ और ‘ग्वन्तनामों बे’ में जो कुछ हुआ वह सीआइए के ‘मैनुअल’ का हिस्सा था। जिसकी नींव इन्हीं प्रयोगों के आधार पर पड़ी थी। इन प्रयोगों को गुप्त रुप से उन मरीजों पर आजमाया जाता था जो मानसिक रुप से काफी बीमार होते थे और इलाज के लिए Ewen Cameron के पास आते थे। कहने की जरुरत नही कि ये प्रयोग उन्ही मरीजों पर किये जाते थे जो आर्थिक व सामाजिक रुप से निम्न वर्ग से आते थे। बाद में इस प्रयोग की खबर लीक होने के बाद इसे बन्द कर दिया गया। परिणामस्वरुप कई लंबे मुकदमे भी चले और कई पीडि़तों को मुआवजा भी देना पड़ा। इनमें से कई पीडि़तों के फिल्म में इन्टरव्यू भी है। प्रयोग के नाम पर उनके साथ जो कुछ हुआ उसने उन्हे हमेशा हमेशा के लिए शारीरिक या मानसिक रुप से अपाहिज बना दिया। प्रयोग भले ही बन्द हो गया लेकिन सीआइए ने अपने निष्कर्ष निकाल लिये। और उसका ‘टार्चर मैनुअल’ तैयार हो गया।
नोमी क्लेम ने यह बहुत सही बात उठायी है कि दुनिया भर में मानवाधिकार संगठन टार्चर के मुद्दे को प्रायः उसके सन्दर्भो से काट कर सिर्फ व्यक्तिगत क्रूरता के रुप में उठाते है। नोमी क्लेम बताती हैं कि ऐसा है नहीं। टार्चर वर्तमान सरकारों की एक नीति है जिसके स्पष्ट आर्थिक सामाजिक राजनीतिक व सांस्कृतिक उद्देश्य हैं। फिल्म में इस पहलू पर ज्यादा जोर नही है। लेकिन किताब में इसे बहुत ही ग्राफिक तरीके से समझाया गया है।
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नोमी क्लेम ने इसे एक रुपक के रुप में लेते हुए 1970 के बाद के पूंजीवाद जिसे हम ‘नवउदारवादी पूंजीवाद’ के रुप में जानते है, के जन्म और विकास का विस्तार से वर्णन किया है। नोमी क्लेम इस दौर के पूंजीवाद को ‘डिजास्टर कैपिटलिज्म'[ Disaster Capitalism] का नाम देती है। उपरोक्त रुपक के माध्यम से नोमी क्लेम बताती हैं कि इस डिजास्टर कैपिटलिज्म की विशेषता है कि यह जनता को शाक थेरेपी देकर ही अस्तित्व में आ सकता है। और दूसरा यह कि इस डिजास्टर कैपिटलिज्म का लोकतंत्र से छत्तीस का आकड़ा है। तीसरी विशेषता इसकी यह है कि यह प्राकृतिक विपदा का अपने हक में बखूबी इस्तेमाल करता है। और जहां प्राकृतिक विपदा नही है वहां यह इसे जानबूझकर पैदा करता है। अमरीका में ‘कैटरीना’ तूफान में जब सभी सरकारी स्कूल तबाह हो गये तो वहां निजी स्कूल खोलने के पूंजीपतियों को अवसर मिल गये। कैटरीना से तबाह हुए जगहों पर सरकारी स्कूल गायब हो गये। यही हाल इण्डोनेशिया में आये तूफान के साथ भी हुआ। तूफान से तट के किनारे गरीबों की वे झोपडि़यां बह गयी जिन्हे बड़े होटलों के मालिक काफी समय से खाली कराने का प्रयास कर रहे थे। तूफान के बाद सरकार के सहयोग से इन जगहों पर बड़े होटलों का कब्जा हो गया।
जहां तक मानव जनित विपदा का उदाहरण है तो इसका सबसे बड़ा उदाहरण ईराक है। ईराक की सुनियोजित तबाही के बाद जब पुनर्निमाण का समय आया तो इसका सबसे बड़ा ठेका अमरीकी कम्पनी ‘हैलीबर्टन’ को मिला।
डिजास्टर कैपिटलिज्म के जनक है नोबेल पुरस्कार प्राप्त अर्थशास्त्री मिल्टन फ्रीडमैन। ‘थैचर’ और ‘रीगन’ के ये काफी करीबी थे। थैचर और रीगन ने अपने अपने देशों में जो ‘उदारीकरण’, ‘निजीकरण’ और ‘वैश्वीकरण’ की नीतियां लागू की उनकी प्रेरणा ‘शिकागो स्कूल’ के जनक मिल्टन फ्रीडमैन ही थे। नोमी क्लेम अपनी किताब और इस फिल्म में बहुत प्रखर तरीके से यह बताती हैं कि भले ही अमरीका और ब्रिटेन ने अपना लोकतंत्र को लबादा नही उतारा है लेकिन इस लबादे के नीचे वही तानाशाही काम कर रही है जिसके बिना इस डिजास्टर कैपिटलिज्म की नीतियों को लागू करना संभव नही है।
यह अकारण नही है कि डिजास्टर कैपिटलिज्म का पहला प्रयोग चिली में ‘अलेन्दे’ की चुनी हुई प्रगतिशील सरकार को बलपूर्वक हटा कर वहां की सैन्य तानाशाही के अधीन लागू किया गया। मिल्टन फ्रीडमैन ने इसमें व्यक्तिगत रुचि ली और इसमें सीआइए की भूमिका तो अब जगजाहिर है। पुराने फुटेज के आधार पर चिली के इस प्रयोग को बहुत ही सशक्त तरीके से फिल्म में पेश किया गया है। इसी परम्परा में जब मार्गरेट थैचर ने अपने यहां खनन का निजीकरण करना चाहा तो उन्हें मजदूरों के सशक्त विरोध का सामना करना पड़ा। थैचर ने इस न्यायपूर्ण प्रतिरोध को किस तरह कुचला यह अब तस्वीरों में कैद है। ‘केन लोच’ ने इसपर अपनी बहुत ही मशहूर डाक्यूमेन्ट्री which side are you on बनायी है जो इस ब्लाग के आर्काइव में सुरक्षित हैं।
फिल्म के बीच बीच में नोमी क्लेम के कई लेक्चर की फुटेज का इस्तेमाल किया गया है जिससे डिजास्टर कैपिटलिज्म की समझ और साफ होती है।
जो लोग भी पुंजीवाद के विकल्प के बारे में गंभीरता से सोचते हैं उनके लिए यह एक जरुरी किताब है। यह किताब आप NaomiKlein-TheShockDoctrine डाउनलोड कर सकते हैं। जिन्हे इतनी मोटी किताब पढ़ने में दिक्कत हो वे इस पर आधारित फिल्म यहां देख सकते हैं।

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