Matir Moina [The Clay Bird]

‘मातिर मोयना’ [The Clay Bird] कुछ उन फिल्मों में से है जिनकी सबसे बड़ी खूबी उनका ‘सरल नरेशन’ होता है।
मदरसे में पढ़ने वाले एक बच्चें अनु के माध्यम से 1960 के दशक के पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के राजनीतिक-सांस्कृतिक-सामाजिक और धार्मिक बदलावों की कहानी कहती यह फिल्म एक साथ ही बहुत मुखर भी है और बहुत शान्त भी, एकदम वहां की नदियों की तरह।
मशहूर डायरेक्टर तारिक मसूद की यह फिल्म 2002 में आयी थी, लेकिन बांग्लादेश में तुरन्त ही इसे बैन कर दिया गया। हालांकि 2002 में ही ‘कान्स फिल्म फेस्टिवल’ में इसे काफी सराहा गया। इस फिल्म का एक और सशक्त पहलू इसका संगीत है, जिसे बांग्ला की मशहूर गायिका मौसिमी भौमिक ने दिया है। ऊपर प्रस्तुत खूबसूरत सूफी गीत इसी फिल्म में से है।
और जैसा कि अक्सर ऐसी फिल्मों के साथ होता है, इसके सभी कलाकार ‘गैर पेशेवर’ है। जो इसकी सरलता और प्रवाह को और भी निखार देते हैं।
डायरेक्टर तारिक मसूद कुछ लोग उचित ही बांग्लादेश का ‘जफर पनाही’ भी कहते हैं।
आप यह खूबसूरत और अर्थपूर्ण फिल्म यहां देख सकते हैं।

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