Daily Archives: 2018/09/28

‘सआदत हसन’ मर गया ‘मंटो’ जिन्दा है……….

मैं उस सोसाइटी की चोली क्या उतारूंगा जो पहले से ही नंगी है। उसे कपड़े पहनाना मेरा काम नहीं है। यह काम दर्जी का है।- मंटो 2017 के ‘जश्न-ए-रेख़्ता’ में जब मैंने ‘नंदिता दास’ को यह कहते सुना कि वे … Continue reading

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