‘Shubhradeep Chakravorty’: Filmmaker with a conscience

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मशहूर डाकूमेन्ट्री फिल्म निर्माता ‘शुभ्रदीप चक्रवर्ती’ का दिनांक 25 अगस्त को एम्स मे ब्रेन हैमरेज होने से मौत हो गयी। लेकिन अपने श्रद्धांजलि वक्तव्य में मशहूर फिल्म निर्माता ‘आनन्द पटवर्धन’ ने जो कहा वह कही अधिक परेशान करने वाला है। उन्होने कहा-‘‘शुभ्रदीप बहुत ही डिप्रेशन में थे क्योकि उनकी फिल्म को ‘सीबीएफसी’ ने पास करने से इंकार कर दिया था।’’ उनकी हाल की फिल्म ‘इन दिनों मुजफ्फरनगर’ पर सरकार ने रोक लगा दी है। मोदी के शासनकाल में यह दूसरी फिल्म है जिसपर रोक लगायी गयी है। इससे पहले पंजाबी फिल्म ‘कौम दे हीरे’ पर भी रोक लग चुकी है। सच तो यह है कि बात सिर्फ इतनी ही नही है। उन्हे हिन्दूवादी संगठनों की तरफ से इधर लगातार धमकियां भी मिल रही थी, जिससे वे काफी परेशान थे। मोदी के आने के बाद क्या इसी तरह के डिप्रेशन में मशहूर साहित्यकार ‘यू आर अनन्तमूर्ती’ (जिनका अभी 22 अगस्त को देहांत हुआ। उनका मशहूर कथन था कि यदि मोदी प्रधानमंत्री बने तो वे देश छोड़ देंगे।) भी नही रहें होंगे। और उन्हे मौत की ओर धकेलने में क्या इसने भी अपनी भूमिका नहीं निभायी होगी। बहरहाल यदि शुभ्रदीप चक्रवर्ती की बात करें तो इनकी पहली ही फिल्म ने लोगो का ध्यान खींचा था। यह फिल्म थी – ‘Godhra Tak: The Terror Trail’। इस डाक्यूमेन्ट्री में उन्होंने साफ साफ स्थापित किया कि साबरमती एक्सप्रेस के बोगी एस-6 में आग बाहर से नही बल्कि अंदर से लगी थी। गोधरा कांड की जांच करने के लिए जब ‘बैनर्जी कमेटी’ बनी थी तब इस फिल्म को भी एक सबूत के तौर पर बैनर्जी कमेटी में शामिल किया गया था। इस फिल्म के प्रदर्शन के दौरान अहमदाबाद और जयपुर में उन पर हिन्दूवादी संगठनों ने हमले भी किये। एक बार तो उन्हे गिरफ्तार भी कर लिया गया था। हालांकि बाद में सबूतों के अभाव में उन्हे छोड़ दिया गया।
उनकी दूसरी फिल्म थी- ‘Encountered on Saffron Agenda‘। इसमें उन्होने गुजरात के फर्जी मुठभेड़ ( गुजरात पुलिस ने 2002 में समीर खान पठान, 2003 में सादिक जमाल, 2004 में इशरत जहां व जावेद शेख तथा 2005 शोहराबुद्दीन शेख को फर्जी मुठभेड़ में मार डाला था।) का पर्दाफाश किया था।
उनकी तीसरी फिल्म थी- ‘Out of Court Settlement‘ यह फिल्म ‘शाहिद आजमी’ (शाहिद आजमी पर तो फीचर फिल्म भी बन चुकी है।) जैसे उन तमाम वकीलों पर है जो निदोर्ष मुस्लिमों का केस लड़ने और उन्हे अनेकों तरह की सहायता पहुंचाने के कारण हमेशा हिन्दुवादी संगठनों की हिट लिस्ट में रहते हैं। आपको पता ही होगा कि शाहिद आजमी की तो इसी कारण हत्या तक कर दी गयी थी।
उनकी चौथी फिल्म थी-‘After the Storm‘ यह फिल्म उन नौजवान मुस्लिमों पर है जो कोर्ट से तो बरी हो चुके है लेकिन जिंदगी को शुरु करने में उनका अतीत उनका पीछा नही छोड़ रहा है।
‘En Dino Muzaffarnagar’ उनकी आखिरी फिल्म साबित हुई।
‘शुभ्रदीप चक्रवर्ती’ उन फिल्मकारो में थे जिनकी फिल्में बहुत साफ तौर पर राजनीतिक होती है और तात्कालिक चुनौतियों से सीधे मुठभेड़ करती है। इसलिए वे हमेशा प्रतिक्रियावादी ताकतों के निशाने पर रहेे।
ऐसे साहसी फिल्ममेकर को हमारा सलाम।

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