Author Archives: kriti shree

‘Mephisto’: एक कलाकार जिसने अपनी आत्मा फासीवादियों को बेच दी….

जर्मन फासीवाद पर वैसे तो कई बेहतरीन फिल्में हैं, लेकिन 1981 में आयी यह फिल्म एकदम अलग तरह की है। ‘हेन्डरिक’ एक स्टेज कलाकार है। वह आम तौर से वाम की ओर झुका हुआ हैै। और उसी तरह के नाटक … Continue reading

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Stephen Hawking and ‘Crisis In Physics’

14 मार्च को मशहूर वैज्ञानिक व गणितज्ञ ‘स्टीफन हाकिन्स’ की मृत्यु के बाद उन पर काफी कुछ लिखा जा चुका है। निस्सन्देह उन्हेांने विज्ञान को लोकप्रिय बनाने में बड़ा योगदान किया है। उनके राजनीतिक विचार भी आमतौर से प्रगतिशील थे। … Continue reading

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‘ख़बर इतिहास का पहला कच्‍चा ड्राफ्ट होती है’: ‘द पोस्‍ट’

‘ख़बर इतिहास का पहला कच्‍चा ड्राफ्ट होती है’ और ‘प्रेस को शासकों की नहीं शासितों की सेवा करनी चाहिए’ पत्रकारिता के इन दोनो उसूलों का पालन करते हुए ‘द पोस्‍ट फ़िल्म की प्रोटेगेनिस्‍ट कैथरिन ग्राहम ने अपने अंतरद्वंद को हल … Continue reading

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‘भीमा कोरेगांव’ के 200 साल के बहाने कुछ बातें

इस साल जब लोग नये साल का जश्न आदतन मना रहे होंगे तो समाज का एक हिस्सा 1 जनवरी को एक ऐसी घटना की 200वीं बरसी मना रहा होगा जिसने दलितों के आत्मसम्मान की लड़ाई को एक नयी दिशा दी। … Continue reading

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Matir Moina [The Clay Bird]

‘मातिर मोयना’ [The Clay Bird] कुछ उन फिल्मों में से है जिनकी सबसे बड़ी खूबी उनका ‘सरल नरेशन’ होता है। मदरसे में पढ़ने वाले एक बच्चें अनु के माध्यम से 1960 के दशक के पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) के राजनीतिक-सांस्कृतिक-सामाजिक … Continue reading

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मुझे कदम-कदम पर

आज मुक्तिबोध का जन्मदिन है…..एक प्रिय कविता……… गजानन माधव मुक्तिबोध » मुझे कदम-कदम पर चौराहे मिलते हैं बांहें फैलाए! एक पैर रखता हूँ कि सौ राहें फूटतीं, मैं उन सब पर से गुजरना चाहता हूँ, बहुत अच्छे लगते हैं उनके … Continue reading

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‘मिनिस्ट्री आॅफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ : आज के दौर का एक राजनीतिक दस्तावेज

बाल्ज़ाक ने कहा था ‘फिक्शन वस्तुतः देशों का गुप्त इतिहास होता है।’ लेकिन अरुन्धती राॅय का उपन्यास ‘मिनिस्ट्री आॅफ अटमोस्ट हैप्पीनेस’ भारत देश के वर्तमान दौर का एक ‘ओपन सीक्रेट’ है। यह एक ऐसा सीक्रेट है जिसे हम जितना ही … Continue reading

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अगर शार्क आदमी होते — बर्तोल्त ब्रेख्त

मकान मालकीन की छोटी लड़की ने क महाशय से पुछा– “अगर शार्क आदमी होते तो क्या छोटी मछलियों के साथ उनका व्यवहार सभ्य-शालीन होता?” उन्होंने कहा- “निश्चय ही, अगर शार्क आदमी होते तो वे छोटी मछलियों के लिए समुद्र में … Continue reading

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कृषि संकट : आर्थिक कुप्रबंधन की देन है – देविंदर शर्मा

देश में खेती की निर्भरता का सच क्या है? जीडीपी में योगदान का वास्तविक आंकड़ा कितना है? सच ये है कि हर प्रधानमंत्री देश को कृषि प्रधान बताता है। मगर बजट पेश करने वाला हर वित्त मंत्री बजट में एग्रीकल्चर … Continue reading

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An Interview With Anand Patwardhan

For over 40 years Anand Patwardhan’s documentary films have stood for freedom of expression. He faced censorship on numerous occasions, took the government to court, and won each time. Anand is not just a filmmaker but an activist in the … Continue reading

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